दुःख का अनुभव किए बिना सुख का महत्व पता नहीं चलता. इस लिए दुःख से घबराना नहीं चाहिए. दुःख से सीखना चाहिए. समस्याओं के प्रति सकारात्मक द्रष्टिकोण रखने से अनेक समस्याएं आसानी से हल हो जाती हैं. मनुष्य को प्रकृति से सीखना चाहिए, उस से मुकाबला नहीं करना चाहिए. प्रकृति के नियमों का अनुसरण करके सुखी जीवन जिया जा सकता है.
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Monday, January 05, 2009

सुखी जीवन के कुछ उपयोगी कथन

हर सच्चाई तीन मंजिलों से गुजरती है. पहले उसका मजाक उड़ाया जाता है. फ़िर उसका हिंसक विरोध कियाजाता है. अंत में, 'यही सच है', मानकर उसे स्वीकार कर लिया जाता है.
आर्थर  

जो लोग इतिहास की गलतियों से सीखते नहीं, उन्हें दोहराते हैं.
संत्याना 

जो प्रश्न करता है मूर्ख है पाँच मिनट के लिए, पर जो प्रश्न नहीं करता मूर्ख है हमेशा के लिए.
चाइनीज प्रोवर्ब 

मैं किसी को पढ़ा नहीं सकता, मैं केवल उन्हें सोचने को प्रोत्साहित कर सकता हूँ.
सोक्रेटेस  

मैं सुनता हूँ और भूल जाता हूँ. मैं देखता हूँ और याद रखता हूँ. मैं करता हूँ और समझ जाता हूँ. 
कंफुसिउस 
 
सब काम मुश्किल हैं आसान होने से पहले.
थॉमस फुलर 

मैंने देखा है कि मैं जितना ज्यादा काम करता हूँ मेरा भाग्य उतना ही उदित होता है.
थॉमस जेफरसन 

मैं अभी भी सीख रहा हूँ.
माइकेल एंजेलो 

जिसने सिद्ध किया है उस का विश्वास करो. एक एक्सपर्ट का विश्वास करो.
विर्गील, एनिड  

सीखना ऐसी दौलत है जो हमेशा और हर जगह आपका पीछे आती है.
चाइनीज प्रोवर्ब 

बिना उत्साह के कभी कोई मान कार्य नहीं किया गया.
राल्फ  वाल्डो  एमरसन 

हम ज्यादा काम करते हैं, हम और ज्यादा काम कर सकते हैं. 
विलियम  हेज्लेट 
 
इंसान का दिमाग जब एक नए विचार से विकसित हो जाता है, कभी वापस संकुचित नहीं होता. 
ऑलिवर वेन्डेल होल्म्स, जूनियर 

बुराई करने वाले क्या कहते हैं इस की चिंता मत करो क्योंकि कभी किसी बुराई  करने वाले ने किसी की मूर्ति नहीं बनाई. 
जीन   सिबेलिउस  

हमारे पीछे क्या है और हमारे आगे क्या है, यह सब कुछ नहीं उसके मुकाबले जो हमारे अन्दर है. 
ऑलिवर  वेन्डेल  होल्म्स 

हर समस्या जो मैंने हल की उस से भविष्य में आई समस्यायें हल करने में मदद मिली. 
रेने  देस्कार्तेस 

शिक्षा हमारी अज्ञानता की सिलसिलेवार खोज है.
विल डूरांट 

पढ़ने वाले बहुत हैं, सोचने वाले कम. 
हर्रिएत  मर्तिनौ 

आप अनुभव पैदा नहीं कर सकते, आपको अनुभव से गुजरना होता है. 
निर्णय के दिन का इंतज़ार मत करो, हर दिन निर्णय का दिन है. 
अलबर्ट कामस 

सारे इंसान ज्ञान की इच्छा रखते हैं.
शिक्षा बुढ़ापे के लिए सबसे अच्छा संसाधन है. 
अच्छी शुरुआत आधी सफलता है.
जो काम करने से पहले सीखना जरूरी है, उन्हें हम करके सीखते हैं.
अरिस्तोटिल 

Thursday, September 25, 2008

क्या कोई चाहता है दुखी होना?

नहीं, कोई यह नहीं चाहता कि वह दुखी हो. सब चाहते हैं कि उनका जीवन सुखी हो. पर कुछ लोग अपना जीवन सुखी करने के लिए दूसरों का जीवन दुखी कर देते हैं. आज सुबह पार्क में एक सज्जन बता रहे थे कि उनके अपने बेटे ने उनका जीवन दुखी कर रखा है. वह विधुर हैं. उनकी पत्नी का स्वर्गवास कुछ वर्ष पहले हो गया. दो बेटे हैं. बड़े बेटे ने अपना मकान अलग बना लिया है. छोटा बेटा उनके मकान में रहता है. सारे मकान पर उस ने अपना कब्जा कर रखा है. यह सज्जन ग्राउंड फ्लोर पर एक कमरे में रहते हैं. अब उनका बेटा चाहता है कि वह यह कमरा भी खाली कर दें, जिस से वह वहां एक दूकान खोल सके. वह कहाँ जायेंगे इस से उसे कोई मतलब नहीं है. उस की पत्नी और बच्चे भी इन सज्जन से बुरा व्यवहार करते हैं. अब यदि एक बेटा अपने पिता से ऐसा व्यवहार कर सकता है तो दूसरों का क्या कहा जा सकता है.

मेरे एक और जानकार हैं. वह मेरी एक क्लाइंट कम्पनी में काम करते हैं. सत्तर वर्ष से ऊपर उनकी आयु है. यह नौकरी उनको मजबूरी में करनी पड़ी है. दो बेटियाँ हैं उनकी. कोई बेटा नहीं है. दोनों बेटियों की शादी कर दी. पर बड़ी बेटी विधवा हो गई. ससुराल वालों ने उस पर इतना अत्त्याचार किया कि वह दिमागी तौर पर पागल हो गई. उसे और उसकी दो बेटियों को घर से बाहर निकाल दिया. बेचारी अपने पिता के घर आ गई. कभी मेरे पास बैठते हैं तो रोने लगते हैं. कहते हैं कि बेटियों की शादी के बाद वह बहुत सुखी थे. कभी सोचा भी नहीं था कि इस उमर में आकर उन्हें फ़िर भाग-दौड़ करनी पड़ेगी. एक दुःख कि बात यह भी है कि कम्पनी के मालिक उनकी इस मजबूरी का पूरा फायदा उठाते हैं. वह सबसे ज्यादा काम करते हैं पर उन्हें सबसे कम तनख्वाह मिलती है. मेरे आडिट में उनके विभाग में कभी कोई कमी नहीं मिलती. बहुत पैसे हैं कम्पनी के मालिकों के पास, पर इन को इन के काम की पूरी तनख्वाह नहीं देते. मैंने कई बार अपरोक्ष रूप से यह बात उठाई पर कोई न कोई बहाना करके टाल जाते हैं.

हमारे अपार्टमेंट्स में ऐसे कई परिवार हैं जिन्हें दूसरों को दुखी करने में ही आनंद मिलता है. यह सब पढ़े-लिखे हैं और स्वयं को दूसरों से महान साबित करने में लगे रहते हैं. पर कोई मौका नहीं चूकते दूसरों को दुखी करने का. लोग शिकायत करते हैं तो दूसरों पर दोष लगाने लगते हैं.

ऐसा भी नहीं है कि किसी के दुखी जीवन के लिए दूसरे ही जिम्मेदार हों. कुछ लोग ख़ुद ही अपने जीवन को दुखी कर लेते हैं. एक सज्जन हैं. दिन भर इधर-उधर इसकी-उसकी करेंगे. शाम को बहू की शिकायत पत्रिका खोल कर बैठ जायेंगे. थका हारा बेटा दफ्तर से आएगा और यह उसे जरा साँस भी नहीं लेने देंगे और शुरू हो जायेंगे. एक और सज्जन हैं जो सब से अपने बेटे की बुराई करते फिरते हैं. यह भी नहीं सोचते कि सब पड़ोसी उन के बेटे को अच्छी तरह जानते हैं और उसकी बहुत इज्जत करते हैं. ऐसी ही कुछ महिलायें भी हैं. अब अगर यह सब अपने दुखी जीवन का रोना रोते रहें तो क्या किया जाय, ख़ुद ही तो जिम्मेदार हैं उसके लिए.

पता नहीं क्यों कुछ लोग न ख़ुद खुश रहते हैं और न दूसरों को सुखी रहने देते हैं. अरे भाई ख़ुद भी सुखी जीवन बिताओ और दूसरों को भी सुखी जीवन बिताने दो.

प्रेम करो सबसे, नफरत न करो किसी से.

गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं

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सुखी जीवन का रहस्य

दूसरों के सुख में सुखी होंगे तो आपका अपना जीवन सुखी होगा