दुःख का अनुभव किए बिना सुख का महत्व पता नहीं चलता. इस लिए दुःख से घबराना नहीं चाहिए. दुःख से सीखना चाहिए. समस्याओं के प्रति सकारात्मक द्रष्टिकोण रखने से अनेक समस्याएं आसानी से हल हो जाती हैं. मनुष्य को प्रकृति से सीखना चाहिए, उस से मुकाबला नहीं करना चाहिए. प्रकृति के नियमों का अनुसरण करके सुखी जीवन जिया जा सकता है.
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Thursday, December 14, 2006

क्या दूसरों को दुखी कर हम सुखी हो सकते हें?

हम सब सुख चाहते हें। सुख की प्राप्ति के लिय हम हजारों जतन करते हें। क्योंकि हम समाज में रहते हें इस लिए हमारे और दूसरों के सुख एक दूसरे से प्रभावित होते हें। अपने सुख के लिए जतन करते समय क्या हम यह सोचते हें कि हमारे जतन से किसी को दुःख तो नहीं पहुँच रहा? किसी दूसरे को दुःख पहुंचा कर हम सुखी नहीं हो सकते। एक व्यक्ति रात-दिन मेहनत करके धन कमाता है। एक दिन एक चोर उस का धन चुरा लेता है। क्या यह चोर इस चुराए धन से सुखी हो सकता है?

बेईमानी से पैसे कमाना, रिश्वत लेना, सरकार को कर न देना, अपने अधिकार का दुरूपयोग करके दूसरों को दुखी करना, कमजोरों पर अत्याचार करना, यह ऐसे कार्य हें जिन से कोई सुखी नहीं हो सकता। आज कल ऐसा लगता ही कि ऐसे लोग ही ज्यादा सुखी हें। पर सच्चाई कुछ और है। ऐसे लोग हर समय डरे और तनाव में रहते हें। कभी भी तन और मन दोनों से सुखी होकर जीवन नहीं बिता पाते।

यदि आप चाहते है कि आपका जीवन सुखी हो तब आपको इस बात का पूरा ध्यान रखना है कि आप के किसी कार्य से किसी दूसरे को दुःख न पहुंचे।

गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं

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सुखी जीवन का रहस्य

दूसरों के सुख में सुखी होंगे तो आपका अपना जीवन सुखी होगा