दुःख का अनुभव किए बिना सुख का महत्व पता नहीं चलता. इस लिए दुःख से घबराना नहीं चाहिए. दुःख से सीखना चाहिए. समस्याओं के प्रति सकारात्मक द्रष्टिकोण रखने से अनेक समस्याएं आसानी से हल हो जाती हैं. मनुष्य को प्रकृति से सीखना चाहिए, उस से मुकाबला नहीं करना चाहिए. प्रकृति के नियमों का अनुसरण करके सुखी जीवन जिया जा सकता है.
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Wednesday, November 26, 2008

सह-अस्तित्व

आज समाज में चारों और विरोध और हिंसा का वातावरण है. सब जानते हैं कि सह-अस्तित्व के बिना सुखी जीवन सम्भव नहीं है, पर हम सारे वह काम करते हैं जिस से परस्पर विरोध और भय पैदा होता है. सह-अस्तित्व के दार्शनिक, व्यवहारिक और साधना पक्ष, तीनों से अधिकाँश लोग परिचित हैं पर उस पर अमल नहीं कर पाते. आइये देखें यह तीनों पक्ष क्या कहते हैं:

दार्शनिक पक्ष - प्रत्येक बस्तु में अनन्त विरोधी युगल हैं. वे सब एक साथ रहते हैं.

व्यवहार पक्ष - दो विरोधी विचार वाले एक साथ रह सकते हैं. तुम भी रहो और मैं भी रहूँ, यही बात हमारे जगत का सौन्दर्य है. इसलिए विरोधी को समाप्त करने की बात मत सोचो. सीमा का निर्धारण करो. तुम अपनी सीमा में रहो, वह अपनी सीमा में रहे. सीमा का अतिक्रमण मत करो.

साधना पक्ष - विरोध हमारी मानसिक कल्पना है. सह-अस्तित्व में वही बाधक है. यदि हम भय और घ्रणा के  संवेग का परिष्कार करें तो सह-अस्तित्व की बाधा समाप्त हो सकती है. संवेग-परिष्कार के लिए सह-अस्तित्व की अनुप्रेक्षा उपयोगी है.

परस्पर प्रेम और आदर के साथ मिल-जुल कर रहने से ही सुख जीवन का आनंद लिया जा सकता है.  

(लोकतंत्र - नया व्यक्ति नया-समाज से साभार) 

गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं

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सुखी जीवन का रहस्य

दूसरों के सुख में सुखी होंगे तो आपका अपना जीवन सुखी होगा