१. सबका मालिक एक
जाति, धर्म्, समुदाय, आदि व्यर्थ की बातो मे ना पड़ कर आपसी मतभेद भुलाकर आपस मे प्रेम और सदभावाना से रहना चाहिए क्योंकि सबका मलिक एक है ।
२ श्रधा और सबुरी
हमेशा श्रद्धा और विश्वास के साथ जीवन यापन करते हुए सबुरी (सब्र) के साथ जीवन व्यतीत करे !
३.मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है
कभी किसी धर्म की अवहेलना नहीं करनी चाहिए, अपितु सभी धर्मों का सम्मान करना चाहिए. मानवता सबसे बड़ा धर्म कर्म है!
४.जातिगत भेद भुला कर प्रेम पूर्वक रहना
जाति,समाज, भेद-भाव, आदि सब बाते ईश्वर ने नही बलकि इंसानों द्वारा बनाई गई हैं. इसलिए ईश्वर की नजर मे ना तो कोई उच्च है और ना ही कोई निम्न. इसलिए जो काम ईश्वर को पसंद नही है वह मनुष्य को नहीं करना चाहिए अर्थात जात्-पात्, धर्म, समाज आदि मिथ्या बातो मे ना पड़ कर आपस मे प्रेमपूर्वक रह कर जीवन व्यतीत करना चाहिए!
५.गरीबो और लाचारों की मदद करना सबसे बड़ी पूजा है
सब के साथ समानता का व्यवहार करना चाहिए ! गरीबो और लाचारो की यथा सम्भव मदद करनी चाहिए और यही सबसे बडी पुजा है! क्योकि जो गरीबो,लचारो की मदद करता है ईश्वर उसकी मदद करता है!
६.माता-पिता, बुजुर्गो, गुरुजनों, बड़ों का सम्मान करना चाहिए
अपने से बड़ों का आदर सम्मान करना चाहीए! गुरुजनो बुजर्गो को सम्मान करने से उनका आर्शीवाद प्राप्त होता है जिससे हमारे जीवन की मुश्किलो मे सहायता मिलती है!